चौथा एशेज टेस्ट ड्रा होने के बाद केकेआर ने किया ट्वीट जानिए क्यों

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चौथा एशेज टेस्ट ड्रा होने के बाद केकेआर ने किया ट्वीट जानिए क्यों

 

नमस्कार आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग में चौथा एशेज टेस्ट मैच  इंग्लैंड की टीम  आखिरी दिन खत्म होते -होते टेस्ट मैच को बचाने में कामयाब रही  एक समय ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड अब मैच बचा नही पायेगा ऑस्ट्रेलिया की घातक गेंदबाज़ी के सामने एक के बाद एक खिलाड़ी आउट होकर पवेलियन की तरफ लौट रहे थे लेकिन बेन स्टोक्स ,जॉनी बैरेस्टो,जैक लीच ,और अंत  में एंडरसन के चलते इंग्लैंड ने टेस्ट मैच ड्रा करवा लिया

चौथा एशेज टेस्ट दोनो टीम की परफॉर्मेन्स

इंग्लैंड की तरफ से  जॉनी बैरेस्टो ने पहली पारी शानदार सतक लगाया बेन स्टोक्स ,जैक  क्रॉली ने अर्धसतक लगाया वही ऑस्ट्रेलिया की तरफ से उस्मान ख्वाजा ने दोनों परियों में  सतक जड़ा और मैन आफ द मैच भी बने वही इंग्लैंड की तरफ से स्टुअर्ट ब्रॉड ने पहली पारी में 5 विकेट लिए  ,जैक लीच ने दूसरी पारी में 4 विकेट झटके ऑस्ट्रेलिया की तरफ से  बोलैंड ने पहली पारी में 4 विकेट तथा दूसरी पारी में 3 विकेट झटके

चौथा एशेज टेस्ट

 

केकेआर का ट्वीट

टेस्ट मैच ड्रा होने के बाद केकेआर ने अपने ट्विटर हैंडल में एक तस्वीर शेयर करते हुए महेंद्र सिंह धोनी के लिए गौतम गंभीर की आईपीएल में ट्रस्ट मैच वाली फील्ड की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा वह पल जब टेस्ट क्रिकेट में एक स्मार्ट मूव  वास्तव में टी 20 का मास्टर स्ट्रोक या थ्रिलर टाइम होता है

एशेज का इतिहास

जिस तरह भारत और पाकिस्तान के मैच के लिए इन दोनों देशों के क्रिकेटप्रेमी ताक लगाए बैठे रहते हैं कमोबेश उसी तरह इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटप्रेमी दशकों से इनके बीच चली आ रही क्रिकेट सीरीज एशेज का इंतजार करती हैं। एक लंबे अरसे से दोनों ही देश इस सीरीज को जीतने की जद्दोजहद में लगे रहते हैं। यह सीरीज इन दोनों देशों के लिए कोई आम सीरीज नहीं होती बल्कि इसे जीतना इनके मान सम्मान की बात होती है।

दोस्तो एशेज की लड़ाई कोई आज की लड़ाई नहीं है यह लड़ाई तो बहुत पहले ही छिड़ चुकी थी। तो चलिए आज के इस वीडियो में जानते हैं एशेज के इतिहास के बारे में। क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ने के बाद से ही इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच मुकाबले होते आ रहे दोनों ही देश 18 सौ 61 से एक दूसरे के विरुद्ध खेलते आए हैं। कभी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की धरती पर जाकर खेलती है तो कभी ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड के सर्द मौसम में उन्हें चुनौती देने आती थी

क्योंकि यह खेल इंग्लैंड में ही इजाद हुआ था। इसलिए शुरुआती समय में इंग्लैंड की इस पर अच्छी पकड़ थी। माना जाता है कि इंग्लैंड की टीम इतना बेमिसाल क्रिकेट खेलती थी कि उनसे जीतना बहुत ज्यादा मुश्किल था। दूसरे देशों के मैदान में तो इंग्लैंड भी कभी आ जाया करती थी मगर अपने देश में वह कोई भी मैच नहीं हारते थे1

। अपनी इस उपलब्धि पर ही इंग्लैंड को बहुत गुमान था। इंग्लैंड का ये गुमान 29 अगस्त तक 18 सौ 82 को ऑस्ट्रेलिया ने तोड़ दिया था। उस साल ऑस्ट्रेलिया की टीम हमेशा की तरह इंग्लैंड दौरे पर आई थी। हर

 

बार की तरह दोनों के बीच एक टेस्ट मैच होना था। इंग्लैंड की टीम पूरे आत्मविश्वास से भरी हुई थी कि इस बार भी वे ही मैच जीतेंगे। पर शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस स्टेडियम में दर्शकों की भीड़ लग चुकी थी। तमाम ब्रिटिश लोग अपने देश की टीम को जीतते हुए देखने के लिए आ चुके थे। दोनों टीमों के बीच टेस्ट मैच शुरू हुआ मगर हर बार की तरह ऑस्ट्रेलिया कुछ कमजोर दिखाई दे रही थी।

दर्शक इंग्लैंड के जीतने की उम्मीद लगाए बैठे थे लेकिन कुछ ही दिन के खेल में ऑस्ट्रेलिया ने मैच जीत के इतिहास रच दिया। हर कोई इसे देखकर हैरान हो गया कि आखिर इंग्लैंड अपनी ही ग्राउंड में कैसे हार गई। ऑस्ट्रेलिया ने इतिहास रच दिया था। यह बात अखबार वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हो गई और इसी बीच एक खबर ने शुरू किया एशेज का सिलसिला

। दरअसल एक पत्रिका ने अपनी खबर में लिखा कि 29 अगस्त 18 सौ 82 को ओवल के मैदान में इंग्लिश क्रिकेट की मौत हो गई। लाश का अंतिम संस्कार किया जाएगा और उसकी अस्थियां ऑस्ट्रेलिया की टीम अपने साथ ली जाएगी। ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद पूरे इंग्लैंड में जंगल की आग की तरह फैल गई। हर कोई कहने लगा कि इंग्लिश क्रिकेट मर गया और उसकी अस्थियां ऑस्ट्रेलिया चली गई जो अब वापस नहीं आएगी।

इस बात ने इंग्लैंड की क्रिकेट टीम को इतना ठेस पहुंचाया कि उन्होंने ठान ली कि अब तो अपनी हार का बदला वह ऑस्ट्रेलिया से लेकर रहेंगे। किस्मत से उसी साल सर्दियों में इंग्लैंड की टीम को एक टेस्ट सीरीज के दौरे पर ऑस्ट्रेलिया जाना था। यही वह पल था जिसके लिए इंग्लिश किकेट के सारे खिलाड़ी आस लगाकर

 

बैठे हुए थे। वे सब अपनी इज्जत का बदला लेना चाहते थे। थोड़े समय बाद वह दिन आ ही गया। ऑस्ट्रेलिया से मुकाबले के लिए इंग्लैंड की टीम को पानी के जहाज से जाना था। पूरी टीम एक एक करके जहाज पर चढ़ने लगी। आखिर में टीम के कप्तान इवो ब्लैक रह गए थे। कहते हैं कि जहाज पर पांव रखने से पहले उन्होंने कसम खाई कि वे इंग्लिश क्रिकेट की खोई हुई इज्जत को वापस लेकर आएंगे। इस वादे के साथ ही इंग्लैंड की टीम

निकल पड़ी अपने सफर पर ऑस्ट्रेलिया की टीम से इंग्लैंड की टीम को तीन टेस्ट और कुछ खास टोटल मैच खेलने थे। सोशल मैच से उन्हें मतलब नहीं था। उन्हें तो बस सीरीज जीतने थी। इस बार किस्मत इंग्लैंड की टीम के साथ थी। तीन मैचों की सीरीज में इंग्लैंड ने 2 मैच जीत के अपना बदला तो पूरा किया मगर एक नई जंग की शुरुआत कर दी। माना जाता है कि इसके बाद ऑस्ट्रेलिया की एक समाजसेविका लेडी जैनेट क्लार्क ने मजाक के तौर पर इंग्लैंड के कप्तान

को एक छोटा सा कलश दिया जिसने 29 अगस्त 18 सौ बैसाखी के मैच की एक विकेट पेल की रात की उनकी तरफ से तो यह मजाक था मगर इंग्लैंड ने इसे बहुत गंभीरता से लिया और एशेज के उस कलश को वे घर लेकर गए। मगर उस दिन से उन्होंने इसे एक सीरीज का रूप दे दिया। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच की यह जंग एशेज यानी रात के रूप में आज भी जारी है।

समय समय पर इनकी यह सीरीज होती रहती है और आज भी दोनों टीमें एक दूसरे को हराने के लिए खून पसीना एक कर देती हैं। दोनों के बीच हाथापाई तो नहीं मगर

जुबानी तौर पर इन दोनों के बीच की लड़ाई जारी रहती है। माना जाता है कि स्लेजिंग की यह प्रक्रिया एशेज में बहुत आम बात है। कई मौकों पर तो एशेज के दौरान कुछ ऐसा हुआ जो बहुत ही अजीब था। उन्नीस सौ नवासी के एक मैच के दौरान ऑस्ट्रेलिया के पूर्व फास्ट बॉलर डेनिस लिली ने एक मैच में ऐसे बल्ले का इस्तेमाल किया था जिसने सबको हैरान कर दिया। उनका बल्ला बहुत ही चमक रहा था। पहले किसी को समझ नहीं आया कि आखिर ऐसा क्यों है।

मगर जैसे ही डेनिस लिली ने शॉट मारा सब समझ गए कि उनके बल्ले में क्या अलग है। दरअसल डेनिस ने अपने लिए खास एल्युमिनियम का बैट बनवाया था। इसके बाद इस बात की शिकायत इंग्लैंड। खिलाड़ियों ने अंपायर से कर दी। बाद में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान खुद मैदान पर आए और पैड को चेंज करवाया जिसके बाद मैच वापस शुरू हुआ। भले ही कितनी भी ऐक्टिवेट हो जाए ऑस्ट्रेलिया कितनी ही एशेज सीरीज जीत जाए मगर असली ऐशेज़ ट्राफी तो हमेशा इंग्लैंड के पास ही रहेगी

क्योंकि उसे आज भी लॉर्ड्स के किकेट ग्राउंड में ही रखा गया है। उसे इस्तेमाल में नहीं लिया जाता क्योंकि उसे एक रेयर वस्तु मान लिया गया है जो एशेज की ट्रॉफी है जो एशेज की ट्रॉफी एशेज सीरीज के बाद जीतने वाली टीम को दी जाती है वह असल में एक नकली ट्रॉफी है जो हूबहू असली ऐशेज़ जैसी दिखती है। यही कारण है कि असली एशेज ट्रॉफी हमेशा इंग्लैंड के पास ही रहने वाली है दोस्तो एशेज की सीरीज में अपनी फेवरेट टीम का नाम हमें कमेंट बॉक्स में।

 

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