Yash dhul :यश धुल कौन हैं और वह कैसे अपने जीवन मे संघर्ष करके बने इंडिया अंडर 19 टीम के कप्तान..

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यश धुल कौन हैं और वह कैसे अपने जीवन मे संघर्ष करके बने इंडिया अंडर 19 टीम के कप्तान

नमस्कार दोस्तों आपका हमारे नए लेख में स्वागत है आज के लेख में हम यश धुल  के बारे में जानेंगे कि कैसे यश धुल ने भी सचिन तेंदुलकर  की तरह तेज गेंदबाज बनने की मनसा से क्रिकेट खेलना शुरू किया था, लेकिन घरेलू स्तर की क्रिकेट से ही उन्होंने बल्ले के साथ अपनी प्रतिभा दिखाई। जिसके बाद उन्होंने अपने आप को एक बेहतरीन  बल्लेबाज के रूप में अपने आप को स्थापित किया यश धुल उस समय महज सात या

आठ साल के रहे होंगे जब उनके दादा जी जगत सिंह उनकी अंगुली पकड़कर पहली बार रणजी ट्रॉफी क्रिकेटर प्रदीप कोचर की क्रिकेट  अकादमी लेकर गए थे। उसके बाद से ही ऐसा कोई दिन और मैच नहीं गया जब यश धुल को अपने दादा जी  का साथ नहीं मिला हो। दादा और पोते का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता होता है जहाँ प्यार दुलार की बिल्कुल कमी नही होती ऐसा ही प्यार दुलार के  बंधन यश धुल और उनके दादा जी में बंधा था।

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2017 में यश के दादा जी का निधन हो गया , लेकिन पिता विजय धुल ने बेटे यश को दादा की यादों को ढाल बनाने का हौसला दिया   अगले ही दिन न सिर्फ यश मैदान में थे बल्कि उसके बाद उन्होंने अपने जीवन मे  पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले विजय मर्चेंट ट्राफी में पंजाब के खिलाफ शतक लगाया फिर देश की अंडर-19 टीम में जगह बनाई और साथ ही इंडिया अंडर 19 टीम के कप्तान बनकर वेस्टइंडीज  गए

Yash dhull

  • अकादमी में यश की पहली पसंद गेंदबाजी थी

प्रदीप कोचर की क्रिकेट अकादमी में पहुंचने पर यश की  पहली पसंद बल्लेबाजी नहीं बल्कि मध्यम गति की गेंदबाजी थी, लेकिन कोच की नजरों ने उनके अंदर के छुपे हुए  बल्लेबाजी के हुनर को तराशाऔर बल्लेबाजी का मास्टर बना डाला।

  • यश के कोच को आज भी याद है

प्रदीप कोचर की क्रिकेट अकादमी में यश के कोच मयंक निगम को आज भी याद है की जब दिल्ली के नामी सोनेट क्लब के खिलाफ अंडर-16 का मैच था। यश की उम्र महज 12 साल की थी और वह सबसे छोटे थे। वह नंबर चार पर बल्लेबाजी करने  गए,उनके साथ के सभी   बल्लेबाज सस्ते में आउट होने लगे। अकेले यश ऐसे थे जिन्होंने न सिर्फ पारी को संभाला ,चौके ,छक्के भी जड़े और  40 ओवर भी खेले। पारी के बाद सोनेट के क्रिकेटरों ने यश को कंधों पर उठा लिया।

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यश के पिता विजय धुल खुद क्रिकेटर थे। वह दिल्ली क्रिकेट लीग में बतौर हरफनमौला खिलाड़ी खेले। घर में उनके बल्ले और गेंद पड़े रहते थे तो यश इनके साथ खेलता रहता था। एक दिन उसकी मां ने कहा कि इसकी क्रिकेट में रुचि है।

उसके बाद ही यश धुल को उसके दादा जी क्रिकेट  अकादमी लेकर गए। विजय  बताते हैं कि बेटे ने उनका सपना पूरा किया  है। वह तो  कभी भारत के लिए या कोई बड़े दर्जे की  क्रिकेट नहीं खेले, लेकिन बेटा खेल रहा है। उम्मीद है कि वह एक न एक दिन सीनियर भारतीय  टीम में जगह बनाएगा। विजय ने अपने बेटे को  यश को क्रिकेटर बनाने के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी और अपने बेटे के  सलाहकार बन गए

  • यश की टीम हुई  संक्रमित पर नहीं टूटा यश का हौसला

विजय के मुताबिक वेस्टइंडीज में यश के साथ टीम के कुछ सदस्यों के कोरोना से संक्रमित होने की बात सुनकर उन्होंने बेटे को वीडियो कॉल किया। वह थोड़ा चिंतित थे, लेकिन बेटे ने उनकी सारी चिंताएं दूर कर दीं। यश ने उनसे कहा कि चिंता की कोई बात नहीं चार से पांच दिन  ठीक होने में लगेंगे। उसके बाद यश के पिता को विस्वास हो गया था कि भारत की टीम आगे जरूर पहुंचेगी।  ठीक वैसा ही हुआ।

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